“मैं असहमत हो सकता हूँ, लेकिन तुम्हारी बात कहने के अधिकार की रक्षा के लिए मैं हमेशा खड़ा रहूँगा।” — यह भावना जिस संवैधानिक प्रावधान में सबसे गहराई से समाई है, वह है अनुच्छेद 19।
भारतीय लोकतंत्र की आत्मा कहीं और नहीं, अनुच्छेद 19 में धड़कती है। यह वह अनुच्छेद है जो हर भारतीय नागरिक को बोलने, इकट्ठा होने, संगठन बनाने, देश में घूमने, बसने और अपनी पसंद का व्यवसाय करने की छह मूलभूत स्वतंत्रताएं देता है।
जब कोई पत्रकार सरकार की आलोचना करता है, जब कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेता है, जब कोई किसान संघ बनाता है, जब कोई परिवार एक राज्य से दूसरे राज्य में बसने का फैसला करता है — ये सभी अधिकार अनुच्छेद 19 से आते हैं।
लेकिन यह स्वतंत्रता असीमित नहीं है। अनुच्छेद 19 अपने भीतर ही उचित प्रतिबंधों का प्रावधान रखता है — और यही इसकी सबसे जटिल और बहस का विषय बनी विशेषता है।
इस लेख में अनुच्छेद 19 की सभी छह स्वतंत्रताओं, उनके प्रतिबंधों, ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों और व्यावहारिक महत्व को विस्तार से समझेंगे।
एक नज़र में अनुच्छेद 19 | Quick Facts
| विषय | विवरण |
|---|---|
| अनुच्छेद | 19 |
| भाग | भाग III (मौलिक अधिकार) |
| श्रेणी | स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22) |
| मूल स्वतंत्रताएं | 7 (मूल संविधान में) |
| वर्तमान स्वतंत्रताएं | 6 (44वें संशोधन के बाद) |
| हटाई गई स्वतंत्रता | संपत्ति का अधिकार — 19(1)(f) |
| हटाने का वर्ष | 1978 (44वाँ संविधान संशोधन) |
| किसके लिए लागू | केवल भारतीय नागरिक (विदेशियों को नहीं) |
| प्रेरणा स्रोत | अमेरिकी संविधान का प्रथम संशोधन |
| उचित प्रतिबंध | प्रत्येक स्वतंत्रता के लिए अलग-अलग |
| आपातकाल में | निलंबित हो सकती हैं (अनुच्छेद 358) |
अनुच्छेद 19 की पृष्ठभूमि | Background
संविधान सभा में बहस
संविधान सभा में अनुच्छेद 19 पर अत्यंत गहन बहस हुई थी। सदस्यों के सामने यह चुनौती थी कि नागरिकों को पर्याप्त स्वतंत्रता दी जाए, लेकिन साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव की भी रक्षा हो।
यही कारण है कि अनुच्छेद 19 की संरचना दोहरी है:
- पहले खंड में स्वतंत्रताएं दी गई हैं
- बाद के खंडों में राज्य को इन पर उचित प्रतिबंध लगाने की शक्ति दी गई है
अमेरिकी प्रभाव
अनुच्छेद 19 की प्रेरणा अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन (First Amendment) से ली गई है, जो वाक् और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करता है। लेकिन भारतीय संविधान ने इसे और व्यापक बनाया — छह विभिन्न स्वतंत्रताओं को शामिल करके।
अनुच्छेद 19 का पूरा पाठ | Full Text of Article 19
अनुच्छेद 19(1): सभी नागरिकों को निम्नलिखित का अधिकार होगा —
- (क) वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
- (ख) शांतिपूर्वक और निरायुध सम्मेलन की स्वतंत्रता
- (ग) संगम या संघ बनाने की स्वतंत्रता
- (घ) भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण की स्वतंत्रता
- (च) भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भाग में निवास करने और बस जाने की स्वतंत्रता
- (छ) कोई वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता
(मूल खंड (ङ) — संपत्ति अर्जित करने, धारण करने और व्ययन करने का अधिकार — 44वें संशोधन 1978 द्वारा हटा दिया गया)
छह मूलभूत स्वतंत्रताएं — विस्तार से | The Six Freedoms in Detail
1. अनुच्छेद 19(1)(क) — वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
यह अनुच्छेद 19 की सबसे महत्वपूर्ण और सबसे अधिक चर्चित स्वतंत्रता है।
इसमें क्या शामिल है:
| अधिकार | विवरण |
|---|---|
| बोलने का अधिकार | अपने विचार मुखर रूप से व्यक्त करना |
| लिखने का अधिकार | लेख, पुस्तक, ब्लॉग आदि |
| प्रेस की स्वतंत्रता | समाचार पत्र, पत्रकारिता |
| मौन रहने का अधिकार | किसी विचार के प्रति मौन रहना भी अभिव्यक्ति है |
| सूचना का अधिकार | RTI जैसे कानूनों का आधार |
| इंटरनेट और सोशल मीडिया | डिजिटल अभिव्यक्ति |
| कलात्मक अभिव्यक्ति | फिल्म, चित्रकारी, संगीत, नाटक |
| विरोध प्रदर्शन (शांतिपूर्ण) | असहमति व्यक्त करने का अधिकार |
प्रेस की स्वतंत्रता का विशेष महत्व: ध्यान देने योग्य बात यह है कि संविधान में “प्रेस की स्वतंत्रता” शब्द अलग से नहीं लिखा गया — इसे अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत ही अंतर्निहित (Implied) माना जाता है।
Romesh Thappar बनाम मद्रास राज्य (1950) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रेस की स्वतंत्रता वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अनिवार्य हिस्सा है।
इंटरनेट की स्वतंत्रता: Anuradha Bhasin बनाम भारत संघ (2020) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि इंटरनेट तक पहुँच का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार है।
19(2) — वाक् स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध
राज्य निम्नलिखित आधारों पर इस स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगा सकता है:
| आधार | विवरण |
|---|---|
| भारत की प्रभुसत्ता और अखंडता | राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध बात |
| राज्य की सुरक्षा | देश की सुरक्षा को खतरा |
| विदेशी राज्यों से मैत्रीपूर्ण संबंध | कूटनीतिक संबंधों को नुकसान |
| लोक व्यवस्था | सार्वजनिक शांति भंग करने वाला भाषण |
| शिष्टाचार और सदाचार | अश्लील या अभद्र सामग्री |
| न्यायालय की अवमानना | न्यायपालिका की गरिमा को चुनौती |
| मानहानि | किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान |
| अपराध के लिए उद्बोधन | हिंसा या अपराध भड़काना |
2. अनुच्छेद 19(1)(ख) — सम्मेलन की स्वतंत्रता
यह नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियार सभा, जुलूस और प्रदर्शन आयोजित करने का अधिकार देता है।
इसमें शामिल है:
- सार्वजनिक सभाएं
- जुलूस और रैलियाँ
- धरना और विरोध प्रदर्शन
- सम्मेलन और संगोष्ठियाँ
दो शर्तें अनिवार्य:
- शांतिपूर्ण (Peaceful) होना चाहिए
- निरायुध (Unarmed) होना चाहिए — अर्थात हथियार के बिना
19(3) — सम्मेलन की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध
केवल दो आधारों पर प्रतिबंध संभव है:
- भारत की प्रभुसत्ता और अखंडता
- लोक व्यवस्था (Public Order)
Himat Lal K. Shah बनाम पुलिस आयुक्त (1973) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि सार्वजनिक स्थानों पर सभा करने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, हालाँकि इसे विनियमित किया जा सकता है।
3. अनुच्छेद 19(1)(ग) — संगम या संघ बनाने की स्वतंत्रता
यह नागरिकों को संगठन, संघ, क्लब, सहकारी समिति, राजनीतिक दल या ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार देता है।
इसमें शामिल है:
| संगठन प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| राजनीतिक दल | किसी भी विचारधारा का दल बनाना |
| ट्रेड यूनियन | श्रमिक संगठन |
| सामाजिक संगठन | NGO, सामाजिक संस्थाएं |
| सहकारी समितियाँ | कृषि सहकारी समितियाँ |
| व्यावसायिक संघ | वकील संघ, डॉक्टर संघ |
| धार्मिक संगठन | धार्मिक समुदाय संगठन |
19(4) — संगम स्वतंत्रता पर प्रतिबंध
प्रतिबंध के आधार:
- भारत की प्रभुसत्ता और अखंडता
- लोक व्यवस्था
- नैतिकता
महत्वपूर्ण: हड़ताल का अधिकार यह ध्यान देने योग्य है कि संघ बनाने का अधिकार है, परंतु हड़ताल करने का मौलिक अधिकार नहीं है। T.K. Rangarajan बनाम तमिलनाडु सरकार (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों को हड़ताल का कोई मौलिक, कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है।
4. अनुच्छेद 19(1)(घ) — संचरण की स्वतंत्रता
यह नागरिकों को भारत के किसी भी भाग में स्वतंत्रतापूर्वक घूमने का अधिकार देता है।
महत्व:
- एक राज्य से दूसरे राज्य में यात्रा का अधिकार
- आंतरिक प्रवासन की स्वतंत्रता
- राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करना
19(5) — संचरण और निवास पर प्रतिबंध (दोनों के लिए संयुक्त)
प्रतिबंध के आधार:
- सामान्य जनता के हित
- अनुसूचित जनजातियों के हितों का संरक्षण
अनुसूचित क्षेत्रों में प्रतिबंध: कुछ आदिवासी क्षेत्रों (जैसे पूर्वोत्तर के Inner Line Permit क्षेत्र) में बाहरी लोगों के प्रवेश पर विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है — यह 19(5) के अंतर्गत वैध है क्योंकि इसका उद्देश्य आदिवासी संस्कृति और भूमि का संरक्षण है।
5. अनुच्छेद 19(1)(च) — निवास की स्वतंत्रता
यह नागरिकों को भारत के किसी भी भाग में निवास करने और बस जाने का अधिकार देता है।
इसमें शामिल है:
- किसी भी राज्य में घर खरीदना
- स्थायी रूप से बसना
- संपत्ति खरीदकर निवास करना
अपवाद: जम्मू-कश्मीर में पहले अनुच्छेद 370 के कारण विशेष प्रावधान थे, लेकिन 2019 में अनुच्छेद 370 के प्रभावी रूप से निरस्त होने के बाद यह स्वतंत्रता पूरे भारत में समान रूप से लागू है।
6. अनुच्छेद 19(1)(छ) — वृत्ति, व्यापार और कारोबार की स्वतंत्रता
यह नागरिकों को अपनी पसंद का कोई भी पेशा, व्यवसाय, व्यापार या कारोबार चुनने का अधिकार देता है।
इसमें शामिल है:
| अधिकार | विवरण |
|---|---|
| वृत्ति (Profession) | डॉक्टर, वकील, इंजीनियर बनना |
| उपजीविका (Occupation) | कोई भी जीविका का साधन |
| व्यापार (Trade) | व्यवसायिक गतिविधि |
| कारोबार (Business) | कोई भी व्यावसायिक उपक्रम |
19(6) — व्यापार स्वतंत्रता पर प्रतिबंध
प्रतिबंध के आधार:
- सामान्य जनता के हित में
- व्यावसायिक या तकनीकी योग्यताओं की अनिवार्यता
- राज्य द्वारा कोई व्यापार/उद्योग/सेवा का राज्यकरण (पूर्ण या आंशिक एकाधिकार)
उदाहरण: डॉक्टर बनने के लिए MBBS डिग्री अनिवार्य करना — यह 19(1)(छ) का उल्लंघन नहीं बल्कि वैध तकनीकी योग्यता शर्त है।
शराब और जुआ: सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि शराब बिक्री और जुआ जैसे व्यवसायों पर राज्य पूर्ण नियंत्रण या प्रतिबंध लगा सकता है क्योंकि इन्हें “मौलिक अधिकार” की श्रेणी में नहीं रखा गया।
संपत्ति का अधिकार — हटाई गई सातवीं स्वतंत्रता | Right to Property — The Removed Freedom
मूल अनुच्छेद 19(1)(च) [पुराना क्रमांक]
मूल संविधान (1950) में एक सातवीं स्वतंत्रता भी थी — संपत्ति अर्जित करने, धारण करने और व्ययन करने का अधिकार।
क्यों हटाया गया?
| कारण | विवरण |
|---|---|
| भूमि सुधार | ज़मींदारी उन्मूलन में बाधा |
| समाजवादी लक्ष्य | संपत्ति के पुनर्वितरण में रुकावट |
| न्यायिक टकराव | संपत्ति मालिकों द्वारा बार-बार कानूनी चुनौती |
| 44वाँ संशोधन | 1978 में इंदिरा गांधी सरकार के बाद जनता पार्टी सरकार ने हटाया |
संपत्ति का अधिकार अब अनुच्छेद 300A के अंतर्गत एक सामान्य कानूनी अधिकार (Legal Right) है, मौलिक अधिकार नहीं। इसका अर्थ है कि अब इसे न्यायालय में सीधे अनुच्छेद 32 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती, लेकिन फिर भी कानून द्वारा संरक्षित है।
“उचित प्रतिबंध” की अवधारणा | Concept of Reasonable Restrictions
अनुच्छेद 19 की सबसे जटिल और महत्वपूर्ण अवधारणा है “उचित प्रतिबंध” (Reasonable Restrictions)।
“उचित” की कसौटी क्या है?
सर्वोच्च न्यायालय ने कई मामलों में यह स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध:
| शर्त | विवरण |
|---|---|
| तर्कसंगत होना चाहिए | केवल मनमाना प्रतिबंध अवैध |
| आनुपातिक होना चाहिए | उद्देश्य के अनुरूप मात्रा में |
| कानून द्वारा होना चाहिए | कार्यपालिका के मनमाने आदेश से नहीं |
| स्पष्ट और निश्चित होना चाहिए | अस्पष्ट शब्दावली अमान्य |
Chintaman Rao बनाम मध्य प्रदेश राज्य (1950) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि “उचित प्रतिबंध” का अर्थ है कि प्रतिबंध न तो अत्यधिक हो, न ही मनमाना — बल्कि सार्वजनिक हित और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच उचित संतुलन बनाए।
अनुच्छेद 19 — सारांश तालिका | Summary Table
| खंड | स्वतंत्रता | प्रतिबंध का आधार |
|---|---|---|
| 19(1)(क) | वाक् और अभिव्यक्ति | 19(2) — 8 आधार (सुरक्षा, लोक व्यवस्था, मानहानि आदि) |
| 19(1)(ख) | शांतिपूर्ण सम्मेलन | 19(3) — प्रभुसत्ता, लोक व्यवस्था |
| 19(1)(ग) | संगम/संघ | 19(4) — प्रभुसत्ता, लोक व्यवस्था, नैतिकता |
| 19(1)(घ) | संचरण | 19(5) — जनहित, जनजाति हित |
| 19(1)(च) | निवास | 19(5) — जनहित, जनजाति हित |
| 19(1)(छ) | वृत्ति/व्यापार | 19(6) — जनहित, योग्यता, राज्यकरण |
| ~~19(1)(च)~~ पुराना | ~~संपत्ति~~ | 44वें संशोधन (1978) से हटाया गया |
ऐतिहासिक न्यायिक निर्णय | Landmark Cases
1. ए.के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य (1950)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मामला | निवारक निरोध कानून को चुनौती |
| निर्णय | अनुच्छेद 19, 21, 22 को अलग-अलग पढ़ा गया (Silo Approach) |
| महत्व | प्रारंभिक संकुचित दृष्टिकोण — बाद में बदला गया |
2. मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मामला | पासपोर्ट ज़ब्ती — विदेश यात्रा रोकना |
| निर्णय | अनुच्छेद 19, 21 और 14 एक-दूसरे से जुड़े हैं (Golden Triangle) |
| महत्व | अनुच्छेद 19 की व्याख्या का विस्तार |
3. बेनेट कोलमैन बनाम भारत संघ (1973)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मामला | समाचार पत्र पर कागज़ कोटा प्रतिबंध |
| निर्णय | प्रेस की स्वतंत्रता पर अनुचित आर्थिक प्रतिबंध अवैध |
| महत्व | प्रेस स्वतंत्रता को मज़बूती मिली |
4. शाहीन बानो / शांतिपूर्ण प्रदर्शन संबंधी मामले
19(1)(ख) के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर अदालतों ने कई बार संतुलन बनाने का प्रयास किया है — विशेषतः Amit Sahni बनाम पुलिस आयुक्त (2020) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक स्थान को अनिश्चित काल तक बाधित करना अनुचित है, लेकिन शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुरक्षित है।
5. Anuradha Bhasin बनाम भारत संघ (2020)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मामला | जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट प्रतिबंध |
| निर्णय | इंटरनेट का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत संरक्षित |
| महत्व | डिजिटल युग में स्वतंत्रता की नई व्याख्या |
6. Shreya Singhal बनाम भारत संघ (2015)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मामला | IT Act की धारा 66A को चुनौती |
| निर्णय | धारा 66A असंवैधानिक घोषित — अस्पष्ट और अत्यधिक व्यापक |
| महत्व | ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बल मिला |
अनुच्छेद 19 और आपातकाल | Article 19 and Emergency
| स्थिति | प्रभाव |
|---|---|
| सामान्य काल | सभी 6 स्वतंत्रताएं पूर्ण रूप से लागू |
| राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352 के तहत, युद्ध/बाह्य आक्रमण के आधार पर) | अनुच्छेद 358 के तहत अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित हो सकता है |
| 44वाँ संशोधन (1978) के बाद | केवल “युद्ध” या “बाह्य आक्रमण” की स्थिति में निलंबन संभव — “सशस्त्र विद्रोह” में नहीं |
1975-77 आपातकाल का सबक: आंतरिक आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 के दुरुपयोग के अनुभव के बाद 44वें संशोधन ने इस शक्ति को सीमित कर दिया।
अनुच्छेद 19 केवल नागरिकों के लिए | Article 19 — Citizens Only
यह एक महत्वपूर्ण विशेषता है — अनुच्छेद 19 केवल भारतीय नागरिकों को मिलता है, विदेशियों को नहीं।
| अनुच्छेद | किसके लिए लागू |
|---|---|
| अनुच्छेद 14, 20, 21, 22 | नागरिक और विदेशी दोनों |
| अनुच्छेद 19 | केवल भारतीय नागरिक |
| अनुच्छेद 15, 16, 29, 30 | केवल भारतीय नागरिक |
अनुच्छेद 19 और अन्य अनुच्छेदों का संबंध | Relation with Other Articles
| अनुच्छेद | संबंध |
|---|---|
| अनुच्छेद 14 | समानता — 19 के साथ “Golden Triangle” बनाता है |
| अनुच्छेद 21 | जीवन का अधिकार — 19 के साथ परस्पर पूरक |
| अनुच्छेद 301 | व्यापार की स्वतंत्रता (अंतरराज्यीय) — 19(1)(छ) से संबंधित |
| अनुच्छेद 358 | आपातकाल में 19 का निलंबन |
| अनुच्छेद 300A | संपत्ति अधिकार — अब यहाँ स्थानांतरित |
परीक्षा उपयोगी तथ्य | Key Facts for UPSC/SSC
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| अनुच्छेद 19 का शीर्षक | स्वतंत्रता का अधिकार |
| मूल स्वतंत्रताएं | 7 |
| वर्तमान स्वतंत्रताएं | 6 |
| हटाई गई स्वतंत्रता | संपत्ति का अधिकार 19(1)(f) |
| कब हटाई गई | 44वाँ संशोधन, 1978 |
| किसके लिए लागू | केवल भारतीय नागरिक |
| प्रेरणा | अमेरिकी संविधान — प्रथम संशोधन |
| 19(1)(क) पर प्रतिबंध | 19(2) — 8 आधार |
| धारा 66A किस मामले में रद्द | Shreya Singhal केस (2015) |
| इंटरनेट अधिकार किस मामले में | Anuradha Bhasin केस (2020) |
| हड़ताल अधिकार किस केस में नकारा | T.K. Rangarajan केस (2003) |
| Golden Triangle | अनुच्छेद 14, 19, 21 |
| आपातकाल में निलंबन | अनुच्छेद 358 |
| प्रेस स्वतंत्रता कहाँ निहित | 19(1)(क) में अंतर्निहित |
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर | FAQs
प्र. अनुच्छेद 19 में कितनी स्वतंत्रताएं हैं?
उ. वर्तमान में 6 स्वतंत्रताएं हैं — वाक् और अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण सम्मेलन, संगम/संघ, संचरण, निवास और वृत्ति/व्यापार। मूल संविधान में संपत्ति का अधिकार भी सातवीं स्वतंत्रता के रूप में शामिल था, जिसे 1978 में 44वें संशोधन द्वारा हटा दिया गया।
प्र. अनुच्छेद 19 केवल नागरिकों को क्यों मिलता है?
उ. संविधान निर्माताओं ने माना कि वाक् स्वतंत्रता, राजनीतिक संगठन बनाने, देश में बसने और व्यापार जैसे अधिकार राष्ट्र के प्रति नागरिक की संबद्धता से जुड़े हैं — इसलिए ये केवल भारतीय नागरिकों को दिए गए, विदेशियों को नहीं (जबकि अनुच्छेद 21 जैसे अधिकार सभी व्यक्तियों को मिलते हैं)।
प्र. “उचित प्रतिबंध” का क्या अर्थ है?
उ. राज्य अनुच्छेद 19 की स्वतंत्रताओं पर पूर्णतः मनमाने प्रतिबंध नहीं लगा सकता। प्रतिबंध तर्कसंगत, आनुपातिक और कानून द्वारा निर्धारित होना चाहिए। न्यायालय हर मामले में यह जाँचता है कि प्रतिबंध “उचित” है या नहीं।
प्र. संपत्ति का अधिकार अब किस अनुच्छेद के तहत है?
उ. 1978 में 44वें संशोधन के बाद संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं रहा। अब यह अनुच्छेद 300A के तहत एक सामान्य कानूनी अधिकार है।
प्र. क्या हड़ताल करना मौलिक अधिकार है?
उ. नहीं। T.K. Rangarajan बनाम तमिलनाडु सरकार (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संगठन बनाने का अधिकार मौलिक अधिकार है, परंतु हड़ताल करने का कोई मौलिक, कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है।
प्र. इंटरनेट का अधिकार किस अनुच्छेद के तहत संरक्षित है?
उ. Anuradha Bhasin बनाम भारत संघ (2020) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि इंटरनेट तक पहुँच का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(क) — वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता — के तहत संरक्षित है।
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