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भारतीय नौसेना ने जहाज Azini को बचाया: 48 घंटे के ऑपरेशन की 5 बड़ी बातें

भारतीय नौसेना ने जहाज Azini को बचाया और सोमालियाई समुद्री लुटेरों से 20 नाविकों को छुड़ाया

हिंद महासागर और सोमालिया के तटवर्ती समुद्री गलियारों में भारतीय सशस्त्र बलों ने एक बार फिर अपनी अदम्य वीरता, अचूक रणनीति और त्वरित कार्रवाई का लोहा मनवाया है। सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट पर हथियारों से लैस समुद्री डाकुओं द्वारा बंधक बनाए गए ईरानी मछली पकड़ने वाले पोत ‘अज़ीनी’ (Azini) को एक बेहद साहसी और सटीक संयुक्त सैन्य अभियान में सुरक्षित मुक्त करा लिया गया है। इस हैरतअंगेज मिशन में भारतीय नौसेना ने जहाज Azini को बचाया और जहाज पर मौजूद सभी 20 चालक दल के सदस्यों (Crew Members) को बिना किसी खरोंच के सकुशल रिहा कराया।

यह सैन्य ऑपरेशन केवल एक जहाज को छुड़ाने तक सीमित नहीं था। खुफिया इनपुट्स के अनुसार, समुद्री लुटेरे इस मछली पकड़ने वाली नौका को एक ‘मदर शिप’ (Mother Ship) के रूप में तब्दील करने की फिराक में थे, ताकि अरब सागर से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मालवाहक जहाजों (Merchant Ships) पर बड़े हमले किए जा सकें।

भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के इस संयुक्त 48 घंटे के अभियान ने डाकुओं के मंसूबों को समुद्र में ही दफन कर दिया। आइए जानते हैं कि किस तरह भारतीय नौसेना ने जहाज Azini को बचाया और इस हैरतअंगेज रेस्क्यू ऑपरेशन की 5 सबसे महत्वपूर्ण बातें क्या रहीं।


ऑपरेशन का घटनाक्रम: कैसे बंधक बना था जहाज ‘Azini’?

सोमालिया के उत्तर-पूर्वी समुद्री तट के पास (हाफून और बंदर बायला के निकट) ईरानी ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाज ‘Azini’ पर भारी हथियारों से लैस सोमाली समुद्री डाकुओं ने अचानक धावा बोल दिया था। डाकुओं ने चालक दल के सभी 20 सदस्यों को गनपॉइंट पर बंधक बना लिया और संचार प्रणालियों को अपने नियंत्रण में ले लिया।

समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को जैसे ही संकट का संकेत मिला, भारतीय नौसेना के समुद्री सुरक्षा कमान केंद्र ने तत्काल ‘एंटी-पायरेसी मिशन’ को सक्रिय कर दिया। अरब सागर में अग्रिम मोर्चे पर तैनात भारतीय नौसेना के गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक/फ्रिगेट युद्धपोत और लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान (P-8I) को तुरंत उस इलाके की ओर मोड़ दिया गया।


48 घंटे का संयुक्त ऑपरेशन: एक नजर में

जिस पेशेवर तालमेल के साथ भारतीय नौसेना ने जहाज Azini को बचाया, उसने आधुनिक नौसैनिक युद्ध कौशल का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है:

ऑपरेशनल पैरामीटरविवरण
लक्षित पोतएफवी अज़ीनी (FV Azini – ईरानी मछली पकड़ने वाला जहाज)
घटनास्थलसोमालिया का उत्तर-पूर्वी तट (हाफून / बंदर बायला क्षेत्र)
अभियान की अवधिलगभग 48 घंटे का निरंतर समन्वय और घेराबंदी
शामिल बलभारतीय नौसेना का अग्रिम युद्धपोत, टोही विमान, मार्कोस (MARCOS) और वायुसेना का C-17
मिशन का परिणामसभी 20 बंधक सुरक्षित, समुद्री लुटेरों का नेटवर्क निष्प्रभावी, पोत पूरी तरह सुरक्षित

सी-17 विमान से मार्कोस (MARCOS) कमांडोज की हैरतअंगेज एयरड्रॉप

इस पूरे मिशन का सबसे निर्णायक और तकनीकी रूप से कठिन हिस्सा वह था, जब भारतीय वायुसेना के महाबली परिवहन विमान सी-17 ग्लोबमास्टर III (C-17 Globemaster III) की मदद ली गई।

जहाज ‘Azini’ सोमालिया के तट के करीब तेजी से आगे बढ़ रहा था और तट पर पहुंचने के बाद बंधकों को छुड़ाना बेहद जोखिम भरा हो सकता था। ऐसे में समय की बचत के लिए भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान से खुले समुद्र में एक रणनीतिक कॉम्बैट एयरड्रॉप की योजना बनाई गई:

  • भारतीय वायुसेना के विमान ने अत्यधिक ऊंचाई से नौसेना के एलीट मार्कोस (MARCOS – मरीन कमांडोज) को कॉम्बैट रबर रेडिंग क्राफ्ट्स (CRRC नौकाओं) के साथ समुद्र में सटीक एयरड्रॉप किया।
  • समुद्र में उतरते ही मार्कोस कमांडोज ने तुरंत अपनी विशेष इन्फ्लेटेबल नौकाओं को सक्रिय किया और रात के अंधेरे में पानी की सतह पर तेज गति से आगे बढ़ते हुए अपहृत जहाज की घेराबंदी शुरू कर दी।
  • यह वही विशिष्ट रणनीति थी जिसके बल पर भारतीय नौसेना ने जहाज Azini को बचाया, क्योंकि हवा और पानी के इस दोतरफा दबाव ने समुद्री डाकुओं को संभलने का एक सेकंड का भी मौका नहीं दिया।

समुद्री डाकुओं का आत्मसमर्पण और 20 नाविकों की सुरक्षित रिहाई

जैसे ही नौसेना के युद्धपोत और हवा से उतरे मार्कोस कमांडोज ने जहाज ‘Azini’ को चारों तरफ से घेर लिया, नौसैनिक दल ने लाउडस्पीकर और रेडियो ट्रांसमिशन के माध्यम से डाकुओं को सख्त चेतावनी जारी की।

  1. सख्त सामरिक दबाव: भारतीय नौसेना के स्नाइपर्स और कमांडोज ने जहाज के सामरिक पॉइंट्स को पूरी तरह अपने निशाने पर ले लिया।
  2. जहाज पर बोर्डिंग: डाकुओं के बचने के सारे रास्ते बंद हो चुके थे। कमांडोज ने रणनीति के तहत जहाज पर चढ़ाई (Boarding Operation) की और बिना कोई गोली चलाए या चालक दल को नुकसान पहुंचाए समुद्री लुटेरों को हथियार डालने पर मजबूर कर दिया।
  3. सघन तलाशी और जांच: पोत पर मौजूद सभी हथियारों, गोला-बारूद और समुद्री डकैती के उपकरणों को जब्त कर लिया गया।
  4. चिकित्सीय और मानवीय सहायता: बंधक बनाए गए सभी 20 चालक दल के सदस्यों की नौसेना के मेडिकल डॉक्टरों द्वारा गहन जांच की गई, उन्हें स्वच्छ भोजन, ताज़ा पानी और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया।

इस त्वरित मानवीय और सामरिक हस्तक्षेप से यह सुनिश्चित हुआ कि भारतीय नौसेना ने जहाज Azini को बचाया और उसे सोमालिया के तट पर समुद्री डकैती का सुरक्षित ठिकाना बनने से रोक दिया।


समुद्री लुटेरों के ‘मदर शिप’ प्लान पर पानी फिरा

समुद्री डकैती की दुनिया में ‘मदर शिप’ का सिद्धांत बेहद खतरनाक माना जाता है। सोमाली समुद्री डाकू अक्सर छोटे मछली पकड़ने वाले जहाजों का अपहरण करते हैं क्योंकि:

  • इन जहाजों में बड़ा ईंधन टैंक और राशन का भंडार होता है।
  • इनका उपयोग करके डाकू अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन में सैकड़ों मील गहरे समुद्र तक जा सकते हैं।
  • वहां से वे हाई-स्पीड बोट्स लॉन्च करके बड़े-बड़े कंटेनर जहाजों, तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को निशाना बनाते हैं।

यदि भारतीय नौसेना ने जहाज Azini को बचाया न होता, तो यह जहाज आने वाले महीनों में अदन की खाड़ी और पश्चिमी अरब सागर में अनगिनत व्यापारिक जहाजों के लिए एक बड़ा खतरा बन जाता। इस सफल रेस्क्यू ने अरब सागर के महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गलियारे को एक बहुत बड़े खतरे से बचा लिया है।


हिंद महासागर में ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ के रूप में भारत की भूमिका

यह पहला मौका नहीं है जब भारतीय सशस्त्र बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ऐसा अदम्य साहस दिखाया हो। ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत भारतीय नौसेना लंबे समय से अरब सागर और बाब-अल-मंदेब से लेकर फारस की खाड़ी तक निरंतर गश्त कर रही है।

  • जाति और राष्ट्रीयता से परे सहायता: चाहे भारतीय नागरिक हों, ईरानी हों, पाकिस्तानी हों या यूरोपीय नाविक—भारतीय नौसेना ने हमेशा समुद्र में संकटग्रस्त जहाजों की रक्षा बिना किसी भेदभाव के की है।
  • त्वरित प्रतिक्रियाकर्ता (First Responder): हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में किसी भी प्राकृतिक आपदा, समुद्री डकैती या मिसाइल-ड्रोन हमलों के समय भारतीय नौसेना सबसे पहले पहुंचने वाली वैश्विक शक्ति साबित हुई है।
  • अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा: वैश्विक तेल आपूर्ति और कंटेनर फ्रेट का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से गुजरता है। भारत की यह सक्रिय उपस्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. भारतीय नौसेना ने किस जहाज को सोमालिया तट पर समुद्री डाकुओं से छुड़ाया?

भारतीय नौसेना ने ईरानी ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले पोत ‘अज़ीनी’ (FV Azini) को सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास समुद्री लुटेरों के चंगुल से सफलतापूर्वक छुड़ाया।

2. जहाज Azini पर कितने क्रू मेंबर्स सवार थे और उनकी स्थिति क्या है?

जहाज पर कुल 20 चालक दल के सदस्य सवार थे। भारतीय नौसेना के मार्कोस कमांडोज ने सभी 20 सदस्यों को बिना किसी चोट या नुकसान के सुरक्षित और सकुशल बचा लिया है।

3. जहाज Azini के रेस्क्यू में मार्कोस कमांडोज की क्या भूमिका थी?

भारतीय वायुसेना के C-17 विमान की मदद से मार्कोस कमांडोज और उनकी विशेष अटैक बोट्स को खुले समुद्र में एयरड्रॉप किया गया। इन जांबाज कमांडोज ने अपहृत जहाज की त्वरित घेराबंदी की और लुटेरों को आत्मसमर्पण के लिए विवश किया।

4. क्या इस रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई जनहानि हुई?

नहीं, भारतीय नौसेना के इस पेशेवर और सटीक ऑपरेशन में किसी भी चालक दल के सदस्य या नौसैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और मिशन 100% सफल रहा।

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