भारत के इतिहास में एक ऐसा क्षण आया जब पहली बार पूरे उपमहाद्वीप को एक सूत्र में पिरोया गया — यह था मौर्य साम्राज्य (Maurya Empire) का उदय।
एक साधारण युवक जिसने सिकंदर को टक्कर देने का सपना देखा, जिसे एक कुशल ब्राह्मण गुरु ने तराशा, और जिसने अपनी बुद्धि और साहस से सबसे शक्तिशाली नंद वंश को उखाड़ फेंका — यही था चंद्रगुप्त मौर्य।
और फिर उसी वंश में एक ऐसा सम्राट हुआ जिसने युद्ध जीतकर भी तलवार रख दी, जिसने धर्म और करुणा को राजनीति का आधार बनाया — वह था अशोक महान।
मौर्य साम्राज्य केवल एक राजनीतिक इकाई नहीं था — यह भारत की पहली राष्ट्रीय पहचान थी।
मुख्य तथ्य एक नज़र में | Key Facts at a Glance
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थापना | 321 BCE — चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा |
| अंत | 185 BCE — पुष्यमित्र शुंग द्वारा |
| राजधानी | पाटलिपुत्र (आज का पटना, बिहार) |
| सबसे बड़ा विस्तार | अशोक के काल में — लगभग 50 लाख वर्ग किमी |
| प्रमुख शासक | चंद्रगुप्त, बिंदुसार, अशोक |
| राजकीय धर्म | वैदिक (चंद्रगुप्त), जैन (अंत में), बौद्ध (अशोक) |
| प्रशासनिक ग्रंथ | अर्थशास्त्र (चाणक्य / कौटिल्य) |
| प्रमुख स्रोत | अशोक के शिलालेख, मेगस्थनीज़ की इंडिका, अर्थशास्त्र |
| क्षेत्र | अफ़गानिस्तान से बंगाल तक, हिमालय से दक्कन तक |
मौर्य वंश के शासक | Maurya Dynasty Rulers
| शासक | काल | विशेष उपलब्धि |
|---|---|---|
| चंद्रगुप्त मौर्य | 321–297 BCE | साम्राज्य की स्थापना, नंद वंश का अंत |
| बिंदुसार | 297–272 BCE | दक्षिण भारत तक विस्तार, “अमित्रघात” |
| अशोक महान | 272–232 BCE | कलिंग युद्ध, बौद्ध धर्म, धम्म नीति |
| दशरथ | 232–224 BCE | अशोक के उत्तराधिकारी, कमज़ोर शासन |
| सम्प्रति | 224–215 BCE | जैन धर्म का प्रसार |
| शालिशुक | 215–202 BCE | साम्राज्य का क्षय आरम्भ |
| बृहद्रथ | 187–185 BCE | अंतिम मौर्य शासक |
मौर्य साम्राज्य की स्थापना | Foundation of the Maurya Empire
चाणक्य और चंद्रगुप्त — इतिहास की सबसे बड़ी जोड़ी
चाणक्य (कौटिल्य / विष्णुगुप्त) तक्षशिला विश्वविद्यालय के एक प्रखर ब्राह्मण विद्वान थे। उन्हें नंद दरबार में अपमानित किया गया था — इसी अपमान का बदला लेने की शपथ ने इतिहास बदल दिया।
चंद्रगुप्त मौर्य एक साधारण परिवार से थे। कुछ स्रोतों के अनुसार वे नंद वंश की एक शाखा से थे, कुछ उन्हें मोर पालने वाले (मयूरपोषक) परिवार से बताते हैं।
नंद वंश का पतन:
चाणक्य ने चंद्रगुप्त को तराशा — राजनीति, युद्धकला, कूटनीति सब सिखाया।
रणनीति के तहत पहले उत्तर-पश्चिम के छोटे राज्यों को जीता गया, सिकंदर के चले जाने के बाद उत्पन्न राजनीतिक शून्य का फायदा उठाया गया, नंद साम्राज्य की आंतरिक कमज़ोरियों और जनता की असंतुष्टि को अपने पक्ष में किया गया। 321 BCE में पाटलिपुत्र जीता और नंद वंश का अंत किया।
सेल्यूकस से संधि (305 BCE):
सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर ने भारत पर पुनः आक्रमण किया। चंद्रगुप्त ने उसे पराजित किया।
| संधि की शर्त | विवरण |
|---|---|
| सेल्यूकस का दिया क्षेत्र | अफ़गानिस्तान, बलूचिस्तान, काबुल |
| चंद्रगुप्त की ओर से | 500 हाथी |
| वैवाहिक संबंध | सेल्यूकस की पुत्री का विवाह (संभवतः) |
| राजदूत | मेगस्थनीज़ पाटलिपुत्र भेजा गया |
चाणक्य का अर्थशास्त्र | Kautilya’s Arthashastra
अर्थशास्त्र चाणक्य की वह अमर कृति है जो राजनीति, अर्थनीति और प्रशासन का विश्वकोश है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| रचयिता | कौटिल्य (चाणक्य) |
| भाषा | संस्कृत |
| संरचना | 15 अधिकरण, 150 अध्याय |
| विषय | राजनीति, कूटनीति, युद्ध, अर्थव्यवस्था, जासूसी, कानून |
| खोज | 1905 में R. Shamasastry ने खोजा |
| महत्व | दुनिया का पहला व्यवस्थित राजनीति-विज्ञान ग्रंथ |
प्रमुख सिद्धांत:
सप्तांग सिद्धांत — राज्य के 7 तत्व: राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोश, सेना, मित्र।
मंडल सिद्धांत — पड़ोसी राज्य शत्रु होता है, पड़ोसी का पड़ोसी मित्र होता है।
गुप्तचर व्यवस्था — विस्तृत जासूसी नेटवर्क जो पूरे साम्राज्य में फैला हुआ था।
मौर्य शासन व्यवस्था | Maurya Administration
मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था अत्यंत विकसित और व्यवस्थित थी।
केंद्रीय प्रशासन के प्रमुख पद:
| पद | कार्य |
|---|---|
| अमात्य | मंत्री — नीति-निर्माण |
| युवराज | उत्तराधिकारी राजकुमार |
| पुरोहित | धार्मिक अनुष्ठान |
| सेनापति | सेना का प्रमुख |
| समाहर्ता | राजस्व संग्रहकर्ता |
| सन्निधाता | कोषाध्यक्ष |
| दौवारिक | राजमहल का रक्षक |
प्रांतीय प्रशासन:
साम्राज्य को 4 प्रांतों में बाँटा गया था जिन्हें “चक्र” कहते थे:
| प्रांत | राजधानी | क्षेत्र |
|---|---|---|
| उत्तरापथ | तक्षशिला | उत्तर-पश्चिम |
| दक्षिणापथ | सुवर्णगिरि | दक्षिण |
| अवंति | उज्जयिनी | पश्चिम-मध्य |
| पूर्वी प्रांत | तोसलि | पूर्व (कलिंग के बाद) |
प्रांत के प्रमुख को “कुमार” या “आर्यपुत्र” कहते थे — ये प्रायः राजपरिवार के सदस्य होते थे।
स्थानीय प्रशासन:
ग्राम → ग्राम समूह → ज़िला → प्रांत → केंद्र — इस क्रम में प्रशासन चलता था।
- ग्रामिक — गाँव का मुखिया
- गोप — 10 गाँवों का अधिकारी
- स्थानिक — 400 गाँवों का अधिकारी
पाटलिपुत्र की नगर व्यवस्था (मेगस्थनीज़ के अनुसार):
यूनानी राजदूत मेगस्थनीज़ ने पाटलिपुत्र के प्रशासन का विवरण दिया। नगर की व्यवस्था 30 सदस्यों की एक समिति करती थी जो 6 उपसमितियों में विभाजित थी — उद्योग, विदेशियों की देखभाल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, व्यापार, वस्तु जाँच, और कर संग्रह।
चंद्रगुप्त मौर्य | Chandragupta Maurya (321–297 BCE)
चंद्रगुप्त मौर्य भारत के पहले ऐतिहासिक सम्राट थे।
प्रमुख उपलब्धियाँ:
- नंद वंश को समाप्त कर 321 BCE में मौर्य साम्राज्य की स्थापना
- सेल्यूकस को हराकर अफ़गानिस्तान तक साम्राज्य विस्तार
- पहली बार पूरे उत्तर भारत को एक शासन के अंतर्गत लाना
- पाटलिपुत्र को भव्य राजधानी बनाना
अंतिम जीवन:
जीवन के अंत में चंद्रगुप्त ने जैन धर्म स्वीकार किया। वे जैन संत भद्रबाहु के शिष्य बने और श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में जाकर सल्लेखना (उपवास द्वारा देह-त्याग) से मृत्यु को प्राप्त हुए।
बिंदुसार | Bindusara (297–272 BCE)
बिंदुसार चंद्रगुप्त के पुत्र थे। उन्हें “अमित्रघात” (शत्रुओं का विनाशक) भी कहा जाता है।
- दक्षिण भारत तक साम्राज्य का विस्तार किया
- यूनानी राजा एन्टिओकस के साथ राजनयिक संबंध रखे
- आजीवक संप्रदाय के समर्थक थे
- अशोक को उज्जयिनी का राज्यपाल नियुक्त किया था
अशोक महान | Ashoka the Great (272–232 BCE)
अशोक मौर्य वंश के सबसे महान और विश्व इतिहास के सबसे प्रभावशाली शासकों में से एक हैं।
कलिंग युद्ध — जीवन बदलने वाला युद्ध | Kalinga War (261 BCE)
261 BCE में अशोक ने कलिंग (आज का ओडिशा) पर आक्रमण किया।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| युद्ध का वर्ष | 261 BCE |
| कारण | कलिंग की स्वतंत्रता और व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण |
| मृत्यु (अशोक के अनुसार) | लगभग 1 लाख लोग मारे गए |
| कैदी | 1.5 लाख से अधिक |
| परिणाम | अशोक का हृदय-परिवर्तन, बौद्ध धर्म स्वीकृति |
अशोक के 13वें शिलालेख में उन्होंने स्वयं लिखा है कि इस युद्ध के बाद उनका हृदय पश्चाताप से भर गया। उन्होंने बौद्ध भिक्षु उपगुप्त से दीक्षा ली और “धम्म” की नीति अपनाई।
अशोक की धम्म नीति | Ashoka’s Dhamma Policy
अशोक की “धम्म” नीति उनकी सबसे महान देन है।
धम्म के मूल सिद्धांत:
| सिद्धांत | विवरण |
|---|---|
| अहिंसा | पशुओं की हत्या पर प्रतिबंध |
| सत्य | सच बोलना और न्यायपूर्ण आचरण |
| दान | निर्धनों की सहायता करना |
| शील | नैतिक और सदाचारी जीवन |
| सहिष्णुता | सभी धर्मों का समान सम्मान |
| माता-पिता की सेवा | बड़ों और बुज़ुर्गों का आदर |
| गुरु-भक्ति | शिक्षकों का सम्मान और शिक्षा को बढ़ावा |
धम्म प्रचार के साधन:
धम्म महामात्र: विशेष अधिकारी जो पूरे साम्राज्य में धम्म का प्रचार करते थे।
शिलालेख और स्तंभलेख — अशोक की अमर रचनाएँ:
| प्रकार | संख्या | विषय |
|---|---|---|
| प्रमुख शिलालेख | 14 | नैतिकता, धम्म, शासन नीति |
| लघु शिलालेख | अनेक | व्यक्तिगत अनुभव और निर्देश |
| स्तंभ लेख | 7 प्रमुख | प्रमुख स्थानों पर पत्थर के स्तंभ |
| गुहा लेख | कुछ | आजीवक भिक्षुओं को दान की गुफाएँ |
लिपियाँ प्रयुक्त: ब्राह्मी, खरोष्ठी, यूनानी, आरमेइक।
अशोक के प्रमुख शिलालेख और स्तंभ | Major Edicts and Pillars
| स्थान | प्रकार | विशेषता |
|---|---|---|
| सारनाथ (UP) | स्तंभ | चार सिंहों वाला शीर्ष — भारत का राष्ट्रीय चिह्न |
| गिरनार (गुजरात) | शिलालेख | 14 प्रमुख शिलालेख एक साथ |
| शाहबाज़गढ़ी (पाकिस्तान) | शिलालेख | खरोष्ठी लिपि में |
| कंधार (अफ़गानिस्तान) | शिलालेख | यूनानी और आरमेइक लिपि में |
| लौरिया नंदनगढ़ (बिहार) | स्तंभ | सुरक्षित और सम्पूर्ण अवस्था में |
| रुम्मिनदेई (नेपाल) | स्तंभ | बुद्ध-जन्मस्थान पर कर-मुक्ति का उल्लेख |
| मस्की (कर्नाटक) | लघु शिलालेख | पहली बार “अशोक” नाम मिला — पहचान की कुंजी |
अशोक के सामाजिक और जनकल्याण कार्य | Social Welfare Works
अशोक ने राज्य को जनकल्याण का माध्यम बनाया — यह प्राचीन विश्व में एक अनोखी अवधारणा थी:
- राजमार्ग निर्माण: पाटलिपुत्र से तक्षशिला तक, और दक्षिण तक सड़कें
- कुएँ और बावड़ियाँ: यात्रियों की सुविधा के लिए हर कोस पर
- विश्राम गृह: मार्गों पर धर्मशालाएँ और सराय
- औषधालय: मनुष्यों और पशुओं दोनों के लिए — साम्राज्य में और श्रीलंका तक
- वृक्षारोपण: सड़कों के दोनों किनारों पर छायादार पेड़
- पशु-हत्या पर प्रतिबंध: अनेक पशुओं की हत्या वर्जित की
बौद्ध धर्म का विश्व-प्रसार | Spread of Buddhism Under Ashoka
अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रसार में अभूतपूर्व योगदान दिया।
| क्षेत्र | प्रचारक | विशेष विवरण |
|---|---|---|
| श्रीलंका | महेंद्र (पुत्र) और संघमित्रा (पुत्री) | बोधि वृक्ष की शाखा भी ले गए |
| म्यांमार | सोन और उत्तर | बर्मा में बौद्ध धर्म की जड़ें |
| अफ़गानिस्तान | धर्मरक्षित | मध्य एशिया में प्रसार |
| यूनान | महारक्षित | पश्चिमी देशों तक बौद्ध संदेश |
| नेपाल | अशोक स्वयं | लुंबिनी की तीर्थ-यात्रा और स्तंभ |
तीसरी बौद्ध संगीति (250 BCE): अशोक के काल में पाटलिपुत्र में तीसरी बौद्ध संगीति आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की। यहाँ बौद्ध ग्रंथों का संकलन और पाखंडी भिक्षुओं का निष्कासन हुआ।
मौर्य काल की अर्थव्यवस्था | Maurya Economy
| क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| कृषि | राज्य की निगरानी में सिंचाई, भूमि का वर्गीकरण |
| खनन | सोना, चाँदी, लोहा, हीरे की खदानें राज्य के अधीन |
| व्यापार | स्थल और जल दोनों मार्गों से, विदेशी व्यापार भी |
| कर | भूमि कर (उपज का 1/4 से 1/6), व्यापार कर, टोल कर |
| मुद्रा | “पण” — चाँदी के आहत सिक्के |
| उद्योग | वस्त्र, धातु, जहाज़ निर्माण — राज्य नियंत्रित |
| विदेश व्यापार | मेसोपोटामिया, मिस्र, यूनान, श्रीलंका के साथ |
मौर्य काल की कला और स्थापत्य | Art and Architecture
मौर्य काल भारतीय कला का पहला स्वर्णिम चरण था।
अशोक के स्तंभ:
- ऊँचाई: 12–15 मीटर, एक ही पत्थर से काटे गए
- सामग्री: चुनार (उत्तर प्रदेश) का चमकदार बलुआ पत्थर
- शीर्ष: सिंह, हाथी, बैल, घोड़े की आकृतियाँ
- विशेष: सारनाथ का चार-सिंह शीर्ष — भारत का राष्ट्रीय चिह्न
पाटलिपुत्र का महल:
मेगस्थनीज़ ने पाटलिपुत्र के महल को विश्व का सबसे भव्य महल बताया — फारस के सूसा और एकबतना के महलों से भी बड़ा और भव्य।
बराबर और नागार्जुनी की गुफाएँ:
बिहार की इन गुफाओं को आजीवक संन्यासियों के लिए पत्थर काटकर बनाया गया — भारत में पत्थर काटकर गुफा बनाने की पहली परंपरा यहीं से शुरू हुई।
दीदारगंज यक्षिणी:
पटना संग्रहालय में संरक्षित यह मूर्ति मौर्यकालीन मूर्तिकला का उत्कृष्ट उदाहरण है — पत्थर पर चमक आज भी कायम है।
मौर्य साम्राज्य का भौगोलिक विस्तार | Geographical Extent
| दिशा | सीमा | वर्तमान क्षेत्र |
|---|---|---|
| पश्चिम | हिंदुकुश | अफ़गानिस्तान |
| उत्तर-पश्चिम | ईरान की सीमा | बलूचिस्तान |
| उत्तर | हिमालय | नेपाल तक |
| पूर्व | बंगाल | बांग्लादेश सीमा तक |
| दक्षिण | कर्नाटक/आंध्र | केवल तमिलनाडु का दक्षिणी छोर बाहर |
अशोक के समय में यह लगभग 50 लाख वर्ग किमी तक फैला था — प्राचीन विश्व के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक।
मौर्य साम्राज्य का पतन | Decline of the Maurya Empire
अशोक की मृत्यु (232 BCE) के बाद साम्राज्य तेज़ी से कमज़ोर होने लगा।
| पतन का कारण | विस्तृत विवरण |
|---|---|
| कमज़ोर उत्तराधिकारी | अशोक के बाद कोई भी योग्य शासक नहीं हुआ |
| विशाल आकार | इतने बड़े साम्राज्य को केंद्र से नियंत्रित करना असंभव हो गया |
| अहिंसा नीति का दुष्प्रभाव | सेना की उपेक्षा से रक्षा क्षमता घटी |
| खाली खज़ाना | विशाल प्रशासन, दान और निर्माण कार्यों से कोष रिक्त हुआ |
| प्रांतीय विद्रोह | केंद्रीय नियंत्रण ढीला होने पर प्रांतों ने स्वायत्तता ली |
| विदेशी आक्रमण | बैक्ट्रियन यूनानियों और शकों का दबाव |
| पुष्यमित्र शुंग | 185 BCE में अंतिम राजा बृहद्रथ की हत्या |
अंत:
185 BCE में सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने राजा बृहद्रथ की हत्या करके शुंग वंश की स्थापना की और मौर्य साम्राज्य का पर्दा गिरा।
मौर्य साम्राज्य और अन्य प्राचीन साम्राज्यों की तुलना
| पहलू | मौर्य साम्राज्य | रोमन साम्राज्य | फारसी साम्राज्य |
|---|---|---|---|
| काल | 321–185 BCE | 27 BCE–476 CE | 550–330 BCE |
| अधिकतम क्षेत्रफल | ~50 लाख वर्ग किमी | ~50 लाख वर्ग किमी | ~55 लाख वर्ग किमी |
| प्रशासन | अत्यंत केंद्रीकृत | विकेंद्रीकृत | केंद्रीकृत |
| सबसे महान शासक | अशोक | Augustus | Darius I |
| प्रमुख विरासत | बौद्ध धर्म, धम्म | रोमन कानून, भाषा | पारसी धर्म, प्रशासन |
मौर्य साम्राज्य की विरासत | Legacy of the Maurya Empire
मौर्य साम्राज्य की विरासत आज भी हर भारतीय के जीवन में जीवंत है:
1. राष्ट्रीय चिह्न: सारनाथ का चार-सिंह स्तंभ शीर्ष भारत का राष्ट्रीय चिह्न है। नीचे लिखा “सत्यमेव जयते” इसी से प्रेरित है।
2. राष्ट्रीय ध्वज: भारतीय तिरंगे के मध्य में अशोक चक्र (24 तीलियों वाला नीला चक्र) अशोक के सारनाथ स्तंभ से लिया गया है।
3. राजनीतिक एकता की अवधारणा: मौर्य साम्राज्य ने पहली बार भारत को एक राजनीतिक और प्रशासनिक इकाई के रूप में प्रस्तुत किया।
4. चाणक्य नीति: कौटिल्य का अर्थशास्त्र आज भी प्रबंधन, राजनीति-विज्ञान और कूटनीति में पढ़ाया जाता है।
5. बौद्ध धर्म का वैश्विक प्रसार: अशोक के प्रयासों से बौद्ध धर्म एशिया का प्रमुख धर्म बना। जापान, चीन, कोरिया, थाईलैंड, म्यांमार, श्रीलंका — सभी में आज करोड़ों बौद्ध अनुयायी हैं।
महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर | FAQs
प्र. मौर्य साम्राज्य की स्थापना किसने और कब की?
उ. चंद्रगुप्त मौर्य ने 321 BCE में नंद वंश के अंतिम राजा धनानंद को हराकर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की। इसमें उनके गुरु चाणक्य की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
प्र. कलिंग युद्ध कब हुआ और इसका क्या महत्व है?
उ. कलिंग युद्ध 261 BCE में हुआ। इस युद्ध की भीषण तबाही देखकर अशोक का हृदय-परिवर्तन हुआ। उन्होंने युद्ध नीति छोड़ “धम्म विजय” की नीति अपनाई — यह इतिहास का एक अनूठा मोड़ था।
प्र. सारनाथ का स्तंभ क्यों प्रसिद्ध है?
उ. सारनाथ के स्तंभ का चार सिंहों वाला शीर्ष भारत का राष्ट्रीय चिह्न है और इस पर बना अशोक चक्र भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में है।
प्र. मेगस्थनीज़ कौन थे और उन्होंने क्या लिखा?
उ. मेगस्थनीज़ यूनानी राजा सेल्यूकस का राजदूत था जो चंद्रगुप्त के दरबार में पाटलिपुत्र आया। उसने “इंडिका” नामक ग्रंथ लिखा जो तत्कालीन भारत के समाज, प्रशासन और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण विवरण है।
प्र. मौर्य साम्राज्य का अंत कैसे हुआ?
उ. 185 BCE में मगध के सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने अंतिम मौर्य राजा बृहद्रथ की हत्या करके शुंग वंश की स्थापना की और मौर्य साम्राज्य समाप्त हो गया।
प्र. चंद्रगुप्त मौर्य का अंत कहाँ हुआ?
उ. जीवन के अंत में चंद्रगुप्त ने जैन धर्म स्वीकार किया और जैन संत भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) चले गए जहाँ उन्होंने सल्लेखना व्रत (उपवास द्वारा देह-त्याग) से जीवन समाप्त किया।
मौर्य साम्राज्य भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है जिसने पूरे उपमहाद्वीप को एक सूत्र में पिरोया।
चंद्रगुप्त की वीरता, चाणक्य की बुद्धिमत्ता और अशोक की करुणा — इन तीन स्तंभों पर टिके इस साम्राज्य ने विश्व को दिखाया कि शक्ति और नैतिकता साथ-साथ चल सकते हैं।
अशोक ने जब युद्ध जीतकर भी तलवार रख दी, तो उन्होंने दुनिया को यह संदेश दिया कि सच्ची विजय हृदयों की होती है, भूमि की नहीं।
यही कारण है कि आज भी हमारे राष्ट्रीय चिह्न में अशोक के सिंह हैं, हमारे ध्वज में अशोक का चक्र है — और हमारी राष्ट्रीय चेतना में मौर्य साम्राज्य की विरासत जीवित और जागृत है।
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