भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कहानी बिना भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress — INC) के अधूरी है।
1885 में जब कांग्रेस की स्थापना हुई, तब यह एक छोटी-सी सभा थी — कुछ शिक्षित भारतीयों का जमावड़ा। लेकिन धीरे-धीरे इसके वार्षिक अधिवेशन राष्ट्रीय जागरण के महाकुंभ बन गए।
हर वर्ष देश के किसी न किसी शहर में होने वाले इन अधिवेशनों में:
- स्वतंत्रता की माँग उठाई गई
- राष्ट्रीय नीतियाँ तय हुईं
- महान नेताओं ने ऐतिहासिक भाषण दिए
- ऐसे प्रस्ताव पारित हुए जिन्होंने भारत का इतिहास बदल दिया
“पूर्ण स्वराज” का प्रस्ताव, “असहयोग आंदोलन” का आह्वान, “भारत छोड़ो” का नारा — ये सब इन्हीं अधिवेशनों की देन हैं।
यह लेख कांग्रेस के सभी प्रमुख अधिवेशनों का व्यवस्थित, विस्तृत और परीक्षा-उपयोगी विवरण प्रस्तुत करता है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस — एक परिचय | INC — A Brief Introduction
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थापना | 28 दिसंबर 1885 |
| स्थापना स्थान | बॉम्बे (मुंबई), गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज |
| संस्थापक | Allan Octavian Hume (A.O. Hume) |
| प्रथम अध्यक्ष | व्योमेशचंद्र बनर्जी (Womesh Chandra Bonnerjee) |
| प्रथम अधिवेशन में प्रतिनिधि | 72 प्रतिनिधि |
| मुख्य उद्देश्य (प्रारंभ में) | भारतीयों के हितों की रक्षा, ब्रिटिश नीतियों पर चर्चा |
| बाद में उद्देश्य | पूर्ण स्वराज — सम्पूर्ण स्वतंत्रता |
कांग्रेस अधिवेशनों का कालक्रम — सम्पूर्ण सूची | Chronological List of INC Sessions
प्रारंभिक काल (1885–1905) — उदारवादी युग
| वर्ष | स्थान | अध्यक्ष | महत्वपूर्ण बात |
|---|---|---|---|
| 1885 | बॉम्बे | व्योमेशचंद्र बनर्जी | प्रथम अधिवेशन — INC की स्थापना |
| 1886 | कलकत्ता | दादाभाई नौरोजी | द्वितीय अधिवेशन |
| 1887 | मद्रास | बदरुद्दीन तैयबजी | प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष |
| 1888 | इलाहाबाद | जॉर्ज यूल | प्रथम ब्रिटिश अध्यक्ष |
| 1889 | बॉम्बे | सर विलियम वेडरबर्न | — |
| 1890 | कलकत्ता | सर फिरोजशाह मेहता | — |
| 1893 | लाहौर | दादाभाई नौरोजी | — |
| 1895 | पुणे | सुरेंद्रनाथ बनर्जी | — |
| 1896 | कलकत्ता | रहीमतुल्ला सयानी | वंदे मातरम् पहली बार गाया गया |
| 1905 | बनारस | गोपाल कृष्ण गोखले | बंगाल विभाजन के विरुद्ध प्रस्ताव |
महत्वपूर्ण विवरण — प्रारंभिक काल:
1885 — बॉम्बे (प्रथम अधिवेशन):
- तिथि: 28–31 दिसंबर 1885
- स्थान: गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बॉम्बे
- अध्यक्ष: व्योमेशचंद्र बनर्जी
- प्रतिनिधि: 72 (मूल रूप से पुणे में होना था लेकिन हैजे के कारण बॉम्बे में हुआ)
- महत्व: भारतीय राष्ट्रवाद के संगठित रूप की शुरुआत
1887 — मद्रास:
- अध्यक्ष: बदरुद्दीन तैयबजी
- महत्व: कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष — यह सिद्ध किया कि कांग्रेस सभी धर्मों की संस्था है
1888 — इलाहाबाद:
- अध्यक्ष: जॉर्ज यूल
- महत्व: कांग्रेस के प्रथम ब्रिटिश अध्यक्ष
1896 — कलकत्ता:
- अध्यक्ष: रहीमतुल्ला सयानी
- महत्व: “वंदे मातरम्” पहली बार गाया गया — रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया
उग्रवादी काल और सूरत विभाजन (1905–1920)
| वर्ष | स्थान | अध्यक्ष | महत्वपूर्ण बात |
|---|---|---|---|
| 1906 | कलकत्ता | दादाभाई नौरोजी | “स्वराज” शब्द पहली बार — “स्वराज हमारा लक्ष्य है” |
| 1907 | सूरत | रास बिहारी घोष | सूरत विभाजन — गरम दल vs नरम दल |
| 1908 | मद्रास | रास बिहारी घोष | — |
| 1909 | लाहौर | मदन मोहन मालवीय | — |
| 1911 | कलकत्ता | बिशन नारायण धर | जन गण मन पहली बार गाया गया |
| 1915 | बॉम्बे | सर सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा | — |
| 1916 | लखनऊ | अंबिका चरण मजुमदार | लखनऊ समझौता — कांग्रेस-मुस्लिम लीग |
| 1917 | कलकत्ता | एनी बेसेंट | प्रथम महिला अध्यक्ष |
| 1918 | बॉम्बे | सैयद हसन इमाम | — |
| 1919 | अमृतसर | मोतीलाल नेहरू | जलियाँवाला बाग की निंदा |
महत्वपूर्ण विवरण — उग्रवादी काल:
1906 — कलकत्ता:
- अध्यक्ष: दादाभाई नौरोजी (85 वर्ष की आयु में)
- महत्व: पहली बार “स्वराज” को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया
- चार प्रस्ताव पारित: स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा, स्वराज
1907 — सूरत (ऐतिहासिक विभाजन):
- अध्यक्ष: रास बिहारी घोष
- महत्व: कांग्रेस का गरम दल और नरम दल में विभाजन
- गरम दल: बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल (लाल-बाल-पाल)
- नरम दल: गोपाल कृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता
- कांग्रेस मंच पर जूते फेंके गए — ऐतिहासिक अव्यवस्था
1911 — कलकत्ता:
- महत्व: “जन गण मन” पहली बार गाया गया — रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित
1916 — लखनऊ:
- अध्यक्ष: अंबिका चरण मजुमदार
- महत्व: लखनऊ समझौता (Lucknow Pact) — कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच
- पृथक निर्वाचन मंडल की माँग कांग्रेस ने स्वीकार की
- तिलक और जिन्ना दोनों इस समझौते में शामिल
1917 — कलकत्ता:
- अध्यक्ष: एनी बेसेंट (Annie Besant)
- महत्व: कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष
- होमरूल आंदोलन की नेत्री
गांधी युग — असहयोग से भारत छोड़ो तक (1920–1942)
| वर्ष | स्थान | अध्यक्ष | महत्वपूर्ण बात |
|---|---|---|---|
| 1920 | नागपुर | C. विजयराघवाचारी | असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव — गांधी जी का युग शुरू |
| 1921 | अहमदाबाद | हकीम अजमल खाँ | — |
| 1922 | गया | चित्तरंजन दास | — |
| 1923 | काकीनाडा | मौलाना मुहम्मद अली | — |
| 1924 | बेलगाम | महात्मा गांधी | गांधी जी एकमात्र बार अध्यक्ष |
| 1925 | कानपुर | सरोजिनी नायडू | प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष |
| 1927 | मद्रास | M.A. अंसारी | साइमन कमीशन बहिष्कार का प्रस्ताव |
| 1928 | कलकत्ता | मोतीलाल नेहरू | नेहरू रिपोर्ट प्रस्तुत |
| 1929 | लाहौर | जवाहरलाल नेहरू | पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव — 26 जनवरी 1930 |
| 1930 | — | — | सविनय अवज्ञा आंदोलन — कोई अधिवेशन नहीं |
| 1931 | कराची | सरदार वल्लभभाई पटेल | मौलिक अधिकारों का प्रस्ताव |
| 1932 | दिल्ली | अमृत रणछोड़दास सेठ | — |
| 1933 | कलकत्ता | नेली सेनगुप्ता | — |
| 1934 | बॉम्बे | राजेंद्र प्रसाद | — |
| 1936 | लखनऊ | जवाहरलाल नेहरू | — |
| 1937 | फ़ैज़पुर | जवाहरलाल नेहरू | पहला ग्रामीण अधिवेशन |
| 1938 | हरिपुरा | सुभाष चंद्र बोस | — |
| 1939 | त्रिपुरी | सुभाष चंद्र बोस | बोस का पुनर्निर्वाचन — गांधी से मतभेद |
| 1940 | रामगढ़ | मौलाना अबुल कलाम आज़ाद | — |
| 1942 | — | — | भारत छोड़ो आंदोलन — अगस्त 1942 |
महत्वपूर्ण विवरण — गांधी युग:
1920 — नागपुर:
- अध्यक्ष: C. विजयराघवाचारी
- महत्व: असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) का प्रस्ताव पारित
- गांधी जी ने कांग्रेस की कमान सँभाली
- ब्रिटिश उपाधियाँ और पदों का बहिष्कार
1924 — बेलगाम:
- अध्यक्ष: महात्मा गांधी
- महत्व: गांधी जी एकमात्र बार कांग्रेस के अध्यक्ष बने
1925 — कानपुर:
- अध्यक्ष: सरोजिनी नायडू
- महत्व: कांग्रेस की प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष (एनी बेसेंट ब्रिटिश थीं)
1928 — कलकत्ता:
- अध्यक्ष: मोतीलाल नेहरू
- महत्व: नेहरू रिपोर्ट प्रस्तुत — भारत के संविधान का प्रारूप
- डोमिनियन स्टेटस की माँग
1929 — लाहौर (सबसे महत्वपूर्ण अधिवेशनों में से एक):
- अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू (40 वर्ष की आयु में)
- तिथि: दिसंबर 1929
- महत्व:
- “पूर्ण स्वराज (Complete Independence)” का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित
- रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराया गया
- 26 जनवरी 1930 को “स्वतंत्रता दिवस” मनाने का निर्णय
- इसीलिए 26 जनवरी को बाद में गणतंत्र दिवस चुना गया
1931 — कराची:
- अध्यक्ष: सरदार वल्लभभाई पटेल
- महत्व:
- मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) का प्रस्ताव पारित
- गांधी-इरविन समझौते की पुष्टि
- भगत सिंह की शहादत की निंदा
1937 — फ़ैज़पुर:
- अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू
- महत्व: कांग्रेस का पहला ग्रामीण अधिवेशन — महाराष्ट्र के एक छोटे गाँव में
1938 — हरिपुरा:
- अध्यक्ष: सुभाष चंद्र बोस
- महत्व: गुजरात के हरिपुरा में — राष्ट्रीय योजना समिति (National Planning Committee) की स्थापना
1939 — त्रिपुरी:
- अध्यक्ष: सुभाष चंद्र बोस (दोबारा चुने गए)
- महत्व:
- बोस ने गांधी के उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को हराया
- गांधी जी ने कहा — “पट्टाभि की हार मेरी हार है”
- बाद में बोस ने इस्तीफ़ा दिया और फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया
अंतिम चरण — स्वतंत्रता की ओर (1940–1947)
| वर्ष | स्थान | अध्यक्ष | महत्वपूर्ण बात |
|---|---|---|---|
| 1940 | रामगढ़ | मौलाना अबुल कलाम आज़ाद | पहले से लंबित मुद्दे — द्वितीय विश्वयुद्ध |
| 1941 | — | मौलाना अबुल कलाम आज़ाद | — |
| 1942 | बॉम्बे | मौलाना अबुल कलाम आज़ाद | भारत छोड़ो आंदोलन (8 अगस्त 1942) — AICC बैठक, बॉम्बे |
| 1946 | मेरठ | J.B. कृपलानी | — |
| 1947 | — | — | स्वतंत्रता — 15 अगस्त 1947 |
1942 — भारत छोड़ो (AICC बैठक, बॉम्बे):
- तिथि: 8 अगस्त 1942
- स्थान: ग्वालिया टैंक मैदान (अब अगस्त क्रांति मैदान), बॉम्बे
- महत्व:
- “भारत छोड़ो (Quit India)” प्रस्ताव पारित
- गांधी जी का नारा: “करो या मरो (Do or Die)”
- अगले दिन 9 अगस्त को गांधी, नेहरू सहित सभी बड़े नेता गिरफ्तार
कांग्रेस के प्रमुख अधिवेशन — विषयवार सूची | Subject-wise Important Sessions
“पहली बार” वाले अधिवेशन | Historic Firsts
| घटना | वर्ष | स्थान |
|---|---|---|
| प्रथम अधिवेशन | 1885 | बॉम्बे |
| प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष — बदरुद्दीन तैयबजी | 1887 | मद्रास |
| प्रथम ब्रिटिश अध्यक्ष — जॉर्ज यूल | 1888 | इलाहाबाद |
| “स्वराज” शब्द पहली बार — दादाभाई नौरोजी | 1906 | कलकत्ता |
| वंदे मातरम् पहली बार गाया गया | 1896 | कलकत्ता |
| जन गण मन पहली बार गाया गया | 1911 | कलकत्ता |
| प्रथम महिला अध्यक्ष — एनी बेसेंट | 1917 | कलकत्ता |
| गांधी जी अध्यक्ष | 1924 | बेलगाम |
| प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष — सरोजिनी नायडू | 1925 | कानपुर |
| पूर्ण स्वराज प्रस्ताव | 1929 | लाहौर |
| प्रथम ग्रामीण अधिवेशन | 1937 | फ़ैज़पुर |
| भारत छोड़ो प्रस्ताव | 1942 | बॉम्बे (AICC) |
महिला अध्यक्षों की सूची | Women Presidents of INC
| नाम | वर्ष | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|---|
| एनी बेसेंट | 1917 | कलकत्ता | प्रथम महिला अध्यक्ष (ब्रिटिश) |
| सरोजिनी नायडू | 1925 | कानपुर | प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष |
| नेली सेनगुप्ता | 1933 | कलकत्ता | तृतीय महिला अध्यक्ष |
| इंदिरा गांधी | 1959 | — | चतुर्थ महिला अध्यक्ष |
| सोनिया गांधी | 1998–2017, 2022 | — | सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष |
जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षताएँ | Nehru’s Presidencies
जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस की अध्यक्षता चार बार की:
| वर्ष | स्थान | महत्व |
|---|---|---|
| 1929 | लाहौर | पूर्ण स्वराज प्रस्ताव |
| 1936 | लखनऊ | समाजवाद की बात |
| 1937 | फ़ैज़पुर | पहला ग्रामीण अधिवेशन |
| 1946 | — | स्वतंत्रता पूर्व अंतिम अध्यक्ष के रूप में |
अधिवेशनों में पारित प्रमुख प्रस्ताव | Important Resolutions Passed
1. स्वदेशी और बहिष्कार (1905–1906):
- 1905 बनारस: बंगाल विभाजन के विरुद्ध — स्वदेशी आंदोलन का समर्थन
- 1906 कलकत्ता: स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा और स्वराज — चार प्रस्ताव
2. लखनऊ समझौता (1916):
- कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच पहली बार समझौता
- पृथक निर्वाचन मंडल को कांग्रेस की मान्यता
- हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रयास
3. असहयोग आंदोलन (1920 — नागपुर):
- ब्रिटिश सरकार से पूर्ण असहयोग
- उपाधियाँ वापस करना, कौंसिलों का बहिष्कार
- विदेशी वस्त्रों की होली
- राष्ट्रीय स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना
4. पूर्ण स्वराज (1929 — लाहौर):
- भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस नहीं — पूर्ण स्वतंत्रता
- 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय
- सविनय अवज्ञा आंदोलन (दांडी मार्च) की पृष्ठभूमि
5. मौलिक अधिकार प्रस्ताव (1931 — कराची):
- भाषण, धर्म, अंतःकरण की स्वतंत्रता
- सभी नागरिकों को समान अधिकार
- महिलाओं को समान दर्जा
- निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा
- यह प्रस्ताव भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों का आधार बना
6. भारत छोड़ो (1942 — बॉम्बे AICC):
- अंग्रेज़ों को तुरंत भारत छोड़ने का आदेश
- “करो या मरो” — गांधी जी का ऐतिहासिक नारा
- जन आंदोलन का आह्वान
कांग्रेस के प्रमुख अधिवेशन और उनके नगर | City-wise Important Sessions
| नगर | महत्वपूर्ण अधिवेशन वर्ष |
|---|---|
| बॉम्बे (मुंबई) | 1885 (प्रथम), 1915, 1918, 1942 (AICC) |
| कलकत्ता (कोलकाता) | 1886, 1890, 1896 (वंदे मातरम्), 1906 (स्वराज), 1911 (जन गण मन), 1917 (एनी बेसेंट) |
| लाहौर | 1893, 1909, 1929 (पूर्ण स्वराज) |
| मद्रास (चेन्नई) | 1887 (तैयबजी), 1908, 1927 |
| इलाहाबाद (प्रयागराज) | 1888 (जॉर्ज यूल), 1892 |
| लखनऊ | 1916 (लखनऊ समझौता), 1936 |
| बनारस (वाराणसी) | 1905 |
| सूरत | 1907 (विभाजन) |
| नागपुर | 1920 (असहयोग) |
| बेलगाम | 1924 (गांधी अध्यक्ष) |
| कानपुर | 1925 (सरोजिनी नायडू) |
| कराची | 1931 (मौलिक अधिकार) |
| फ़ैज़पुर | 1937 (ग्रामीण अधिवेशन) |
| हरिपुरा | 1938 (सुभाष बोस) |
| त्रिपुरी | 1939 (बोस बनाम गांधी) |
| रामगढ़ | 1940 (आज़ाद) |
कांग्रेस के प्रमुख अध्यक्ष और उनकी उपलब्धियाँ | Notable Presidents of INC
दादाभाई नौरोजी (तीन बार — 1886, 1893, 1906):
- कांग्रेस के “ग्रैंड ओल्ड मैन”
- “Poverty and Un-British Rule in India” पुस्तक के लेखक
- “Drain Theory” — भारत से धन के निष्कासन की अवधारणा
- 1906 में 85 वर्ष की आयु में “स्वराज” शब्द का उद्घोष
बाल गंगाधर तिलक:
- कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बने लेकिन उग्रवादी दल के नेता
- “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है”
- गणपति उत्सव और शिवाजी उत्सव से राष्ट्रीय जागरण
मोतीलाल नेहरू (1919, 1928):
- नेहरू रिपोर्ट (1928) — भारत के संविधान का प्रारूप
- जवाहरलाल नेहरू के पिता
- स्वराज पार्टी के संस्थापक
सुभाष चंद्र बोस (1938, 1939):
- 1938 हरिपुरा: राष्ट्रीय योजना समिति की स्थापना
- 1939 त्रिपुरी: गांधी के उम्मीदवार को हराया
- बाद में फॉरवर्ड ब्लॉक और INA (आज़ाद हिंद फ़ौज) की स्थापना
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद (1940–1945):
- सबसे लंबे समय तक कांग्रेस अध्यक्ष — 6 वर्ष
- स्वतंत्रता संग्राम के कठिन दौर में नेतृत्व
परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण तथ्य | Important Exam Facts
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बिंदु:
- प्रथम अधिवेशन: 1885, बॉम्बे, व्योमेशचंद्र बनर्जी
- प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष: बदरुद्दीन तैयबजी (1887, मद्रास)
- प्रथम ब्रिटिश अध्यक्ष: जॉर्ज यूल (1888, इलाहाबाद)
- स्वराज शब्द: 1906, कलकत्ता, दादाभाई नौरोजी
- वंदे मातरम् पहली बार: 1896, कलकत्ता
- जन गण मन पहली बार: 1911, कलकत्ता
- प्रथम महिला अध्यक्ष: एनी बेसेंट (1917, कलकत्ता)
- सूरत विभाजन: 1907 (गरम vs नरम दल)
- लखनऊ समझौता: 1916 (कांग्रेस-मुस्लिम लीग)
- असहयोग: 1920, नागपुर
- गांधी एकमात्र बार अध्यक्ष: 1924, बेलगाम
- प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष: सरोजिनी नायडू (1925, कानपुर)
- पूर्ण स्वराज: 1929, लाहौर, जवाहरलाल नेहरू
- मौलिक अधिकार प्रस्ताव: 1931, कराची, वल्लभभाई पटेल
- पहला ग्रामीण अधिवेशन: 1937, फ़ैज़पुर
- भारत छोड़ो: 1942, बॉम्बे (AICC), गांधी जी
- सबसे लंबे अध्यक्ष: मौलाना आज़ाद (1940–1945, 6 वर्ष)
- नेहरू जी सर्वाधिक बार अध्यक्ष: चार बार (1929, 1936, 1937, 1946)
महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर | FAQs
प्र. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन कब और कहाँ हुआ?
उ. 28–31 दिसंबर 1885 को बॉम्बे (मुंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में। अध्यक्ष थे व्योमेशचंद्र बनर्जी। इसमें 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
प्र. कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष कौन थीं?
उ. एनी बेसेंट (Annie Besant) — 1917 में कलकत्ता अधिवेशन में। वे ब्रिटिश थीं। पहली भारतीय महिला अध्यक्ष सरोजिनी नायडू थीं — 1925 में कानपुर अधिवेशन में।
प्र. “पूर्ण स्वराज” का प्रस्ताव किस अधिवेशन में पारित हुआ?
उ. 1929 के लाहौर अधिवेशन में — जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में। इसमें 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय भी हुआ।
प्र. सूरत विभाजन क्या था?
उ. 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का गरम दल (तिलक, लाजपत राय, बिपिन पाल) और नरम दल (गोखले, मेहता) में विभाजन हो गया। यह कांग्रेस के इतिहास का पहला बड़ा विभाजन था।
प्र. गांधी जी कितनी बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे?
उ. गांधी जी केवल एक बार कांग्रेस के अध्यक्ष बने — 1924 के बेलगाम अधिवेशन में।
प्र. कराची अधिवेशन (1931) का क्या महत्व है?
उ. सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में हुए इस अधिवेशन में मौलिक अधिकारों का प्रस्ताव पारित हुआ जो बाद में भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों का आधार बना। गांधी-इरविन समझौते की भी यहाँ पुष्टि हुई।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ये अधिवेशन केवल बैठकें नहीं थे — ये भारत की राष्ट्रीय चेतना की धड़कनें थीं।
1885 में जब 72 प्रतिनिधि बॉम्बे में मिले, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह छोटी-सी सभा आगे चलकर विश्व के सबसे बड़े स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करेगी।
1906 में कलकत्ता में “स्वराज” का बीज बोया गया। 1929 में लाहौर में “पूर्ण स्वराज” का वटवृक्ष खड़ा हुआ। और 1942 में बॉम्बे में “भारत छोड़ो” की आँधी उठी जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी।
1885 से 1947 तक — 62 वर्षों में — इन अधिवेशनों ने भारत को दासता से स्वतंत्रता की ओर ले जाने में अतुलनीय भूमिका निभाई।
आज जब हम 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते हैं — तो उसकी जड़ें 1929 के लाहौर अधिवेशन में हैं। जब हम “जन गण मन” गाते हैं — तो वह 1911 के कलकत्ता अधिवेशन की याद है। जब हम मौलिक अधिकारों की बात करते हैं — तो वह 1931 के कराची अधिवेशन की देन है।
ये अधिवेशन भारत के इतिहास के वे पन्ने हैं जो कभी पुराने नहीं होते।
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